मोक्षपर्यंत ध्यानाभ्यास सामग्री सूची

Random Collection

3/random/post-list

OS03 . योग-संगीत || श्रीश्री पंचानन भट्टाचार्य द्वारा रचित 119 बांग्ला पद्यों का भारती भाषा में रुपान्तरित पुस्तक

योग-संगीत

     प्रभु प्रेमियों  !  संगीत सुनने या गुनगुनाने से आपकी  मानसिक स्थिति बेहतर होती है, जबकि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। संतमत सत्संग में योग से संबंधित संगीत या भजन का बड़ा महत्व है । इसी महत्व को देखते हुए बांग्ला भाषा के महान योगी श्री श्री पंचानन भट्टाचार्य जी द्वारा 119 बांग्ला पदों को भारती (हिंदी) में रूपांतरित करके प्रकाशित किया गया है। इस कार्य में पूज्यपाद गुरुसेवी भगीरथ  बाबा एवं पूज्यपाद स्वामी छोटेलाल दास जी महाराज का द्वारा उत्साहित महात्मा श्रीनाथू  दास जी ने अथक प्रयास किया है, जिसके फल स्वरुप यह पुस्तक आपके हाथों में है ।  आइये इस पुस्तक के बारे में थोड़ा जानकारी प्राप्त करें। 

पूज्यपाद  गुरुसेवी भागीरथ साहित्य सीरीज की दूसरी सामग्री  "OS02. गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ । " के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए   👉 यहाँ दवाएँ।

योग-संगीत 01
योग-संगीत

श्रीश्री पंचानन भट्वाचार्य द्वारा रचित बंगाला 119 पद्य का भारती भाषा में रुपान्तरित पुस्तक

     पुज्य गुरुदेव महर्षिं मेँहीँ परमहंस जी महाराज अपने जीवन काल में अखिल भारतीय संतमत-सत्संग महाधिवेशन एवं जिलाधिवेशनों में योग-संगीत नामक पुस्तक से बंगला भजन साज-बाज के साथ गवाते थे। योग-संगीत का पाठ या गायन गुरुदेव को बहुत अच्छा लगता था। इस पुस्तक में साधनानुभूति की बातों से युक्त पद्य भरपूर मात्रा में है। इस पुस्तक से साधना में प्रगति हो इसकी भी प्रेरणादायिनी वाणी है। इसी वाणी को नाथू दासजी हिन्दी लिप्यन्तरण करवाये हैं।   यह पुस्तक योगीराज श्री श्यामाचरण लाहिडी जी महाराज के महान शिष्य योगाचार्य पंडित श्री श्री पंचानन भट्टाचार्य कृत  'योग संगीत' जो कि बांग्ला भाषा में है, उसी का भारती (हिन्दी) भाषा में लिप्यंतरण किया गया है। जिससे बंगाला भाषा में संतों का ज्ञान एवं भारती (हिन्दी) भाषा में संतों का ज्ञान का एकत्व का बोध कर आत्मकल्याण कर सके।

'     योग-संगीत' पुस्तक के बारे में इतनी अच्छी जानकारी के बाद आपके मन में अवश्य विचार आ रहा होगा कि यह पुस्तक हमारे पास अवश्य होना चाहिए, इसके लिए आप 'सत्संग ध्यान स्टोर' से इसे ऑनलाइन मंगा सकते हैं और महर्षि मेँहीँ आश्रम, कुप्पाघाट से भी इसे ऑफलाइन में खरीद सकते हैं. आपकी सुविधा के लिए 'सत्संग ध्यान स्टोर' का लिंक नीचे दे रहे हैं-




इस पुस्तक के बारे में बिशेष
के लिए जानकारी 






प्रेरक शब्दावली


आप इस अनमोल ग्रंथ के मूल संस्करण के लिए न्यूनतम सहयोग राशि ₹75/-  + शिपिंग चार्ज  के साथ  निम्नलिखित लिंक में से किसी एक से ओनलाइन आर्डर करें-





प्रेरक शब्दावली


बिशेष--   प्रभु प्रेमियों ! पुस्तक खरीदने में उपरोक्त लिंक में से कहीं भी किसी प्रकार का  दिक्कत हो, तो आप हमारे व्हाट्सएप नंबर 7547006282 पर मैसेज करें. इससे आप विदेशों में भी पुस्तक मंगा पाएंगे. कृपया कॉल भारतीय समयानुसार  दिन के 12:00 से 2:00  बजे के बीच में ही हिंदी भाषा में करें। शेष समय में कौल करने से मोक्षपर्यंत ध्यानाभ्यास कार्यक्रम में बाधा होता है। अतः शेष समय में व्हाट्सएप मैसेज करें। 

     प्रभु प्रेमियों ! गुरुसेवी स्वामी भगीरथ साहित्य सीरीज में आपने 'महर्षि मेँहीँ के संक्षिप्त जीवन-उपदेश' नामक पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त की. आशा करता हूं कि आप इसके सदुपयोग से इससे से समुचित लाभ उठाएंगे. इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार  का कोई शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें ।  इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले हर पोस्ट की सूचना नि:शुल्क आपके ईमेल पर मिलती रहेगी। ऐसा विश्वास है । जय गुरु महाराज 🙏🙏🙏 




      "BS01. महर्षि मेँहीँ के दिनचर्या उपदेश" इसमें आपने गुरुदेव के दैनिक क्रिया-कलाप का वर्णन, उनके द्वारा बतायी गवी कुछ दवाडइयों एवं उनके कुछ प्रवचनों का संग्रह किया है। यह पुस्तक अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की ओर से प्रकाशित किया जाता है। मुझे विश्वास है कि इसके अध्ययन-मनन करने से आध्यात्मिक लाभ अवश्य होगा इस पुस्तक के बारे में विशेष जानकारी के लिए     👉 यहां दबाएं । 

     सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की पुस्तकें मुफ्त में पाने के लिए  शर्तों के बारे में जानने के लिए   👉 यहां दवाएं


---×---

OS03 . योग-संगीत || श्रीश्री पंचानन भट्टाचार्य द्वारा रचित 119 बांग्ला पद्यों का भारती भाषा में रुपान्तरित पुस्तक OS03 . योग-संगीत || श्रीश्री पंचानन भट्टाचार्य द्वारा रचित 119 बांग्ला पद्यों का भारती भाषा में रुपान्तरित पुस्तक Reviewed by सत्संग ध्यान on नवंबर 29, 2025 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

जय गुरु महाराज कृपया इस ब्लॉग के मर्यादा या मैटर के अनुसार ही टिप्पणी करेंगे, तो उसमें आपका बड़प्पन होगा।

Blogger द्वारा संचालित.